तुम कभी यह न समझना कि , तुम कभी खफा हो जाओगी मुझसे ।
और मुझे कोई , फर्क नही पड़ेगा ।
पड़ेगा फर्क मुझे तेरे , खफा होने से बहुत
जैसे ।
बागों में बहार न आने से , भवरों को ।
कलियों में भवरों के , न मंडराने से फूलो को ।
जैसे सूरज के न निकलने से , धरती को ।
चंद्र के न दिखाने से , मिथुन को ।
सावन के न बरसने से , पपीहे को ।
कमल पर ओस न गिरने से , हंस को ।
फर्क पड़ेगा मुझे भी , इसी तरह से ।
ऐ दोस्त !
तेरा न होना मेरे साथ , मेरे जीवन को ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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