मैं करूँ मैं करूँ देखो , फोन तुमको मेरी ज्यां ।
सुनना करना न इनकार , मेरा फोन मेरी ज्यां ।
देखो दिन हुए ज्यादा , अरे मिलने का किया था वादा ।
फिर तू आयी नही , क्यों मेरी ज्यां ।
मैं करूँ.....
अब तो , रहा नही जाता ।
दिल की हालत है ऐसी , कुछ कहा नही जाता ।
चले सांस ही बिन तुम , नही इसमें प्राण ।
तरसे कान धुन तेरी मधुर , सुने नही कई रोज से मेरी ज्यां ।
सुनना करना न इनकार , मेरा फोन मेरी ज्यां ।
मैं करूँ मैं करूँ देखो , फोन तुमको मेरी ज्यां ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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