कोशिश तो , पूरी ही करेंगे हम ।
खैरियत से ,रहने की ।
अब तकदीर में ,क्या लिखा है ?
यह कौन जाने ।
बच जाएंगे जो इस , अदृश्य दानव के चुंगल से ।
तो फिर मिलेंगे !
हर दिल में दहशत है , ना जाने कौन घड़ी ।
लील ले यह , कोरोना महामारी ।
न जाने कौन घड़ी हो , कब किसकी बारी ।
कोशिश तो , पूरी ही करेंगे हम ।
खैरियत से ,रहने की ।
अब तकदीर में ,क्या लिखा है ?
यह कौन जाने ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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