आज बचपन फिर लौट आया और , माँ भी याद आ गयी ।
बहुत सकुन था तब जिंदगी में , खाये पिये मस्त हो गए ।
खेले कूदे थक हारे और , मस्त सो गए ।
चाहिए जो कुछ न मिले , जिद्द माँ से कर ली ।
रोये धोये और , आँसू माँ ने पोंछ लिए ।
माँ से पाई चिज्जी और , खुश हो लिए ।
बहुत मज़ा था , छुटपन के जमाने में ।
आज बचपन फिर लौट आया और , माँ भी याद आ गयी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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