ब ए शक गुनाह है इश्क , बचिए जनाब !
मिलती नही है जमानत इसकी , किसी भी अदालत में ।
हुए कामयाब तो , संवर जाएगी जिंदगी ।
रहे न कामयाब इश्क में तो , अंधेरे में घिर जाएगी जिंदगी ।
फिर न फरियाद होगी मकबूल , न फैसला हक में ।
खुद से ही खुद की होगी गुफ्तगू अक्सर तन्हाईयों में ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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