दिल के अरमां आंसुओं में बह गए ।
हम दिन भर टीवी देखते ही रह गए ।
मुख्तार को , योगी पुलिस का काफला
बचा कर ले गए ।
हमने तो तुमसे ऐसी तो , न की थी कोई उम्मीद ।
योगी जी निपटाने में क्यों तुम , आज पीछे रह गए ।
शायद ये मीडिया का हाथ , रहा हो जरूर ।
हर पल पल हर दिखया है , जो उसने मुख्तार को ।
शाही खास हो मेहमान , जैसे हो वो हज़ूर ।
शायद मौका तब न मिला हो ,वरना गाड़ी पलटती जरूर ।
✍️ज्योति प्रसाद
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