अभी यूँ ही गुज़र कर ले ऐ दिल , उनके ख्वाब ओ ख्यालों से ।
अभी उनके शहर की फ़िज़ाओं में , जाना मुमकिन नही ।
है धुंधली सी डगर , जो जाती है उनके शहर ।
कयामत के दिन है उधर , बरपा है चाहूं ओर कहर ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
अभी यूँ ही गुज़र कर ले ऐ दिल , उनके ख्वाब ओ ख्यालों से ।
अभी उनके शहर की फ़िज़ाओं में , जाना मुमकिन नही ।
है धुंधली सी डगर , जो जाती है उनके शहर ।
कयामत के दिन है उधर , बरपा है चाहूं ओर कहर ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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