अब आपको कैसे बताऊं के , हम अब वो दरिया है । जिसमे रेत के सिवा , और अब कुछ भी नही ।
शुष्क पड़ी पड़ी , हवाओ के थपेड़ों से ।
अचानक कभी , उड़ी तो उड़ी ।
जीवन के बहुत से , उतार चढ़ाव का बयाँ है ये ।
बस समझने वाला ही , मेरे दिल की जान पायेगा ।
वाह वाही तो , बहुत के पास है ।
दिल का दर्द किसी किसी को ही , नज़र आएगा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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