मालूम हुआ अब के सिर्फ , उसके बचपन तक ही मैं ।
प्यारा भला सुंदर , और सबसे अच्छा था ।
आज कई बार पुकारता हूँ मैं उसे तो , खामोश ही रहता है वो ।
शायद अब उसे मेरी जरूरत, उतनी नही ।
☹️☹️☹️
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
मालूम हुआ अब के सिर्फ , उसके बचपन तक ही मैं ।
प्यारा भला सुंदर , और सबसे अच्छा था ।
आज कई बार पुकारता हूँ मैं उसे तो , खामोश ही रहता है वो ।
शायद अब उसे मेरी जरूरत, उतनी नही ।
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✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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