वो कौन खुशकिस्मत ,
वाला होगा ।
जिसके तुम हो , सपने सजाये ।
हम बिरह बेदी में यूं ही बैठे ,
अपने हुए पराये ।
अश्क बहे बूँद बूँद रखे ,
हमने संजोये ।
डूब गए ले दर्द , उनमें हम ।
अपने हुए न , कभी पराये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
वो कौन खुशकिस्मत ,
वाला होगा ।
जिसके तुम हो , सपने सजाये ।
हम बिरह बेदी में यूं ही बैठे ,
अपने हुए पराये ।
अश्क बहे बूँद बूँद रखे ,
हमने संजोये ।
डूब गए ले दर्द , उनमें हम ।
अपने हुए न , कभी पराये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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