वक्त समझदार हो गया है , अब शायद !
हर कोई अब मुझमें , मेरा रुतबा तलास करता है ।
वो ! हाँ हाँ वो ही , इक दौर भी गुजरा था कभी ।
जब हमारी आंखों में उन्हें , प्यार का जहां दिखता था ।
आज मायने बदल गए है , मोहब्बत के ।
उनकी नज़रों में आज मेरी , हैसियत तुला करती है ।
वो क्या इश्क करे किसी से , नादाँ क्या जाने ।
मोहब्बत तो दिल का , एहसास हुआ करती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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