लो जी अब ख्याल ही रहेगा , आपको मेरा ।
के अब हम तेरी इस महफ़िल से.....
के तेरी अब इस महफ़िल से , बहुत दूर जा रहे है हम ।
न नज़र आएंगे .....न नज़र आएंगे हम तेरी इस महफ़िल में ।
है गुमान जो तुझको , अपनी चढ़ती जवानी का ।
हम भी कम नही के , शोले दबाए हुए है हम अपनी जवानी के ।
भड़क उठे न कही ये तेरी , इस महफ़िल में ।
जलाकर न खाक कर दे कहीं , ये इश्क मेरा तेरे हुश्न को ।
इसलिए तेरी महफ़िल से ,अब जाना ही अच्छा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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