कैसे है आप ? बस इतना बता दीजिएगा ।
भले फिर न हमसे , बातें कीजियेगा ।
लग जाती है फिक्र , बेवजह न जाने क्यों ?
शायद बेवजह की , भी कोई बजह हो ।
हम ऐसे ही है , पहले किसी से जुड़ते ही नही है ।
यदि जुड़ गए तो उन्हें , दिल मे बिठा लेते है ।
चाहे कोई फिर मुड़ कर , भले हाल पूछे न दोबारा ।
मगर हम हर हाल में , उनके ही फिक्र में खोए रहते है ।
यही फितरत है मेरी , जो हमसे बदली नही जाती ।
चल गए जो कोई , दिल से दो कदम साथ ।
उसकी याद दिल से , कभी नही जाती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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