उसके मौन में भी छुपी है , कोई विनाश लीला इंतज़ार करो ।
इंतज़ार करो उस समय का , जो बनकर महाप्रलयकारी ।
फूटेगी खामोशी की धरा से , एक भयंकर ज्वालामुखी ।
टूटेगा मौन वो प्रचंड लहरों से ,ज्वार भाटा का निर्माण होकर ।
मचेगा हाहाकार चाहूँ दिशाओं में ,
चुन चुन कर लेगा हर एक सनातनी , प्रतिशोध अपना ।
सह रहा है जो अत्याचार वो अभी तक मौन होकर ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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