अजीब तमासाई है लोग यहां ,
खुद की नुमाइश बेहिसाब , बड़े शौक से किया करते है ।
यह जुनून भी कमाल का है , खुद को दिखने दिखाने का ।
वाह ! वाह तो ,
कभी किसी के दिल से ,निकलती है हाय ।
सुन कर अपनी तारीफ में कसीदे ,
बहुत खुश हुआ करते है ।
मगरूर भी बना देती है , किसी को ।
भीड़ भी , चाहने वालों की ।
उन्हें फिर अपने सिवा ,और कुछ दिखाई देता नहीं ।
छोड़ो हमें क्या हम भी कह देते है ,
वाह ! बहुत खूब जैसे हर कोई , तारीफ किया करते है ।
अजीब तमासाई है लोग यहां ,
खुद की नुमाइश बेहिसाब , बड़े शौक से किया करते है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें