देखी है , मुद्दतों से आज ।
तस्वीर आपकी यार !
लगा जैसे कि , तुम आयी हो ।
बनके मेरे मन का , चाँद ।
मेरे दिल पर , छाई हो आज ।
ली है आज , अंगड़ाईयाँ ।
मेरे अलसाये हुए , दिल ने ।
सिफर में था जो , अब तलक ।
चमका है वो आज ,
तेरे आफताब से , वर्षों के बाद ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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