इंटरनेट के आने से इस जमाने में ,
बहुत कुछ बदल गया है ।
देखिए ना मेरे जैसा नालायक भी ,
कवि और लेखक बन गया है ।
व्यस्त हैं ,
कुछ तो काटा छांटी , चिपका चिपकी में ।
दूसरों की अपनी बना कर , पेश ओ पेश में ।
अचंभित हैं ,
कुछ अपनी , किसी और के आंगन में खिलती देख ।
निराश है ,
कुछ स्वामित्व अपना , अपनी में हटता देख ।
रचना किसी की , अपनी बन जाए ।
बड़ी चमत्कारी कला है ये , जो किसी को आ जाए ।
मुश्किल नही कोई जो कवि और लेखक ,न बन जाये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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