कुछ कुछ मुझे आज हो रहा है , यह एहसास के ।
कोई अनजान लगा रहा हो मरहम , मेरे जख्म ए दिल पर ।
एक मीठा मीठा सा सकुन , मिल रहा है आज पहली बार ।
होती है मोहब्बत , ऐसी सकुन भरी ।
यह जाना है आज , तुमसे मिलने के बाद ।
😘😘😘
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
कुछ कुछ मुझे आज हो रहा है , यह एहसास के ।
कोई अनजान लगा रहा हो मरहम , मेरे जख्म ए दिल पर ।
एक मीठा मीठा सा सकुन , मिल रहा है आज पहली बार ।
होती है मोहब्बत , ऐसी सकुन भरी ।
यह जाना है आज , तुमसे मिलने के बाद ।
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✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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