हे भगवान क्यों...? क्यों तड़पा तड़पा कर , सता सता कर मार रहे हो ।
एक ही बार में पृथ्वी को , उलट-पलट कर दो ।
ना दर्द के लिए बचेगा कोई , न शिकायत के लिए ।
सब की जीवन लीला इक बार में ही समाप्त कर दो ।
ये सहमी सहमी सी जिंदगी , अब नही जी जाती ।
खुद के हाथों से भी , ये मिटाई नही जाती ।
या जीने दे जी भर , या ले जा तुरंत ।
इस डर के माहौल में अब , किसी को किसी की बेबसी देखी नही जाती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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