किताबों में धूल जमने से माना ,
कहानियां नही बदला करती है ।
हाँ पढ़ना ही बंद कर दो , वो किताबें ।
जिनकी कहानियां ,
दर्द का सबब , बना करती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
किताबों में धूल जमने से माना ,
कहानियां नही बदला करती है ।
हाँ पढ़ना ही बंद कर दो , वो किताबें ।
जिनकी कहानियां ,
दर्द का सबब , बना करती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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