तुम्हें मेल जोल , बढ़ाना पसंद नही ।
तो हमें भी किसी को ,
परेशां करने का , कोई शौक नहीं।
मुआफी के काबिल हो जो मैं ,
तेरी नज़र में तो , मुआफी दे दीजियेगा ।
वादा रहा आज से ,
न भेजेगे हम तुझे , पहगाम फिर कभी ।
अपने खुश मिज़ाजी , या रंज ओ गम का ।
बहुत उदासी सी है , आज की रात ।
दिल बहुत दुखा है , काफी दिनों के बाद ।
कुछ तो दर्द में ,
इज़ाफ़ा तो हुआ है , शायद आज ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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