हर पकवान हर व्यंजन व्यर्थ , जो नही है तू ऐ "सुरा"
तुझ बिन मेहमानदारी अधूरी , हर उत्सव हर्ष का है अधूरा ।
बस इक तू हो जाए "सूरा", चाट ले नमक अकेला ।
भाई मज़ा आ गया है , आव भक्ति खूब हुई है ।
लोटों-घड़ों से हम सबने , भर भर कर "सूरा" खूब पी है ।
यादगार रहेगा दिन ये , फलाना की शादी का ।
मज़े में रत्ती भर की , कोई कमी नही रही है ।
बस थोड़ा सा ज्यादा हो गयी है , वरना नाच में मेरा कोई जबाब नही है ।
😂😂
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें