कर दो कत्ल , अपने हाथों से मेरा ।
देखे तो सही !
महबूब के हाथों से मरना , कैसे लगता है ?
जी लिए बहुत तुझे दिल मे रख कर ।
अब मरकर देखे तो सही , तुझे ! सदा के लिए ।
अपनी बंद पलकों में रखना , कैसा लगता है ?
हर कोई नही समझ पायेगा "मलंग"
तेरी मोहब्बत !
टूट कर चाह हो , जिसने किसी को ।
वो ही दर्द ए एहसास तेरा , समझ पायेगा ।
बे-मोहब्बत क्या जाने,
मोहब्बत में दिल का टूट जाना , कैसे लगता है ?
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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