उम्र ढली है तो क्या , दिल तो अभी बच्चा है ।
प्रेम और कैसा होता है , हमें मालूम नही ।
प्रेम तो प्रेम होता है , क्या झूठा क्या सच्चा है ।
हम तो यूँही आपस में , लड़ते झगड़ते और मुस्कुराते ही रहें है ।
कभी खफा तो कभी , इक दूजे को मानते ही रहे है ।
चैन भी तो आता नही जो , ना देखे ,
उसे मैं और , मुझे वो इक पल ।
यूँ ही कई दशक गुजर कर ली हम दोनों ने , एक दूजे के संग ।
उम्र ढली है तो क्या , दिल तो अभी बच्चा है ।
प्रेम और कैसा होता है , हमें मालूम नही ।
प्रेम तो प्रेम होता है , क्या झूठा क्या सच्चा है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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