हम तो चिराग ए उल्फत ,
दिल मे जलाये हुए है ।
हर शाम वो सहर ।
है इंतज़ार बे सब्र तेरा ,
आने का हकीकत ।
यूँ तो आते ही रहते हो ,
तुम !
हर रोज मेरे ,ख्वाबों के शहर ।
यह प्रेम ही तो है , तेरा मेरा ।
वरना इस जहां में कौन ?
बेगानों को इतनी ,
अहमियत देता है ।
कौन किसी को दुख दर्द ,
अपने ज़ज्बात कहता है ?
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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