काश ! हम तुम कहीं , फिर मिल पाते ।
कुछ तुम कुछ हम, अपनी कह पाते ।
कहते सुनते करते याद ,
गुजरते वक्त की , जो साथ गुजारे हमने ।
काश ! कहीं फिर हम , मिल पाते ।
दिल में इक अजीब सी , हलचल हुआ करती थी ।
तुम जब सामने होते थे ।
कसम तुम्हारी तुम ही ,
मेरे ख्वाबों ख्याल में , हर वक्त रहते थे ।
फर्क उम्र का है , बहुत माना ।
मगर सुना है मोहब्बत , उम्र की ।
मौताज़ नही , हुआ करती ।
दिल की लगी को , दिल ही जाने ।
आ जाये जो , किसी पर तो ।
कोई भी बंदिशे इसे , रोक नही सकती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
😘😘😘
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