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जाते जाते हाँ ! जाते जाते माँ , हर बार मुझसे कह कर , जाया करती थी ।

 जाते जाते हाँ ! जाते जाते माँ , 

हर बार मुझसे कह कर ,

जाया करती थी  ।

अपना ख्याल रखना , मेरा राजा बेटा !

 मैं जल्दी लौट आऊंगी ।

मगर अब की गयी तो , न कुछ कहा ही ।

न लौटी अभी तक ।

ना जाने क्यों ? 

शायद किसी बात पर , खफा हो ?

पूछूं  भी तो कैसे माँ  तुमको , 

तुम ख्वाबों में भी  तो , नही आती हो ।

बाबा हर रोज , तुम्हें याद करते है ।

मन ही मन रोया करते है ।

अपनी थाली में से , 

एक ग्रास तेरे नाम का ।

 हर रोज रखा करते है ।

बुदबुदाते है अपने मे ही , 

ये तूने अच्छा नही किया ।

मुझे भी ले जाते संग अपने ,

क्यों मुझे यहां अकेला छोड़ दिया ।

बहुत टूट चुके है अब वो , 

तुम्हारी यादों में ।

मगर किसी से ,

कुछ कह सकते  नही ।

कभी मुझसे ही , कर लेते है जिक्र तेरा ।

बह निकलती जब यादें बनकर अश्क 

पलको पर वो रोक लिया करते है ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 

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