याद है मुझे वो तेरा , मुँह का चिढ़ाना ।
और मेरे दिल का टूटकर , तुझ पर आ जाना ।
वो तो वर्षो की बात है ।
आज हर वो बात , ख्वाब सी लगती है ।
मोहब्बत का जुनून जब , सर चढ़ कर बोला था ।
तब तू ही तू बस तू हाँ तू , मुझे दिखा करती थी ।
हर तरफ.....और मैं तुझे ।
वो तो वर्षो की बात है ।
आज मैं तो हूँ पर , तुम वो नही ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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