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क्या लिखूं के , तेरे बिन अब । कुछ भी , अच्छा नही लगता ।


क्या लिखूं के , तेरे बिन अब ।

कुछ भी , अच्छा नही लगता ।

दुनिया है दुनियादारी भी मगर , 

तेरे बिन अब .......

इस दुनिया में कुछ भी ,अच्छा नही लगता ।

गिनता हूँ मैं भी अब , 

दिन उंगलियों पर ।

ना जाने कब तक लिखा हो 

नसीब , इस धरा पर ।

बुला ले मुझे भी संग अपने , 

बिन तेरे अब ।

इस धरा पर ,कुछ भी 

अच्छा नही लगता ।

ना पास आने का वक्त है , किसी को ।

न दूर से कोई , पूछता है हाल मेरा ।

किससे कहे , अपना हाल ए दिल ।

है कौन अब , सुने जो ।

आ जाओ मुझे भी संग अपने , ले जाओ के 

तेरे बिन अब ।

इस दुनियां  में कुछ भी , अच्छा नही लगता ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 


 



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