दिल कुछ लिखने को , अब मेरा
करता क्यों नहीं ?☹️
न जाने अब , मेरे तसब्बुर में ।
कोई चेहरा , आता क्यों नहीं ?
अब महसूस नही होता , दर्द ओ गम ।
ना कोई एहसास , खुशी का ।
क्षितिज में ही ,देखता रहता हूँ ।
इक टक...
न जाने इस रात की , सुबह कब हो ।
क्या है आखिर , वो राज़ ए फिक्र ?
मेरे जेहन में वो राज़ आता क्यों नही ।
दिल कुछ लिखने को , अब मेरा
करता क्यों नहीं ?
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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