छोड़ दिया है ,
उसने मुझे ।
किसी की , खातिर ।
अफसोस नही मगर...
सोचती हूँ कि ,
ऐसा क्या था उसमें ,
जो मुझमें नही ।
बस यही इक सवाल था ,
मेरी जिंदगी का ।
जिसका आज तलक....
जवाब न हुआ , हासिल मुझे ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
छोड़ दिया है ,
उसने मुझे ।
किसी की , खातिर ।
अफसोस नही मगर...
सोचती हूँ कि ,
ऐसा क्या था उसमें ,
जो मुझमें नही ।
बस यही इक सवाल था ,
मेरी जिंदगी का ।
जिसका आज तलक....
जवाब न हुआ , हासिल मुझे ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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