और कुछ भी तो नही है अब , पास मेरे ।
सिवा दर्द के .....
कहीं भूल ना जाऊं मैं तुम्हें ,
इसलिए थोड़ा थोड़ा, मैं जख्म अपना ,
हर रोज़ , कुरेद लिया करता हूँ ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
और कुछ भी तो नही है अब , पास मेरे ।
सिवा दर्द के .....
कहीं भूल ना जाऊं मैं तुम्हें ,
इसलिए थोड़ा थोड़ा, मैं जख्म अपना ,
हर रोज़ , कुरेद लिया करता हूँ ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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