लो आखिर ! मिट ही गया तेरा ,
रेत पर उखेरा गया वो , प्यार का घरोंदा जालिम !
मैं न कहता था मत बना ,
ये समंदर का किनारा है , कब तूफान आ जाये क्या खबर ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी....✍️
लो आखिर ! मिट ही गया तेरा ,
रेत पर उखेरा गया वो , प्यार का घरोंदा जालिम !
मैं न कहता था मत बना ,
ये समंदर का किनारा है , कब तूफान आ जाये क्या खबर ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी....✍️
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