काश के आप हमारे होते ।
सारे ना सही तो,
ना ही सही मगर ।
कुछ तो ख्वाब , हमारे पूरे होते ।
काश के आप हमारे होते ।
चंदन सा तेरा तन ,
सुंदर रूप , चंचल चितवन ।
धीरे से तेरा मुस्कुराना ,
काश के होती , खबर तुझे भी ।
हूँ मैं तेरा दीवाना ।
होती न सही ,
वो हँसी , मेरे लिए ।
कोई बात नही ।
देख कर हंसता हुआ ,
चेहरा तेरा ।
बन जाती मेरे ,
मुस्कुराने की वो इक , खूबसूरत वजह ।
काश के आप हमारे होते ।
सारे न सही तो ,
न ही सही मगर ।
कुछ तो ख्वाब हमारे होते ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी...✍️
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