वो इश्क ही क्या जो,
न जान सके दिल की ।
के...
रज़ा में हज़ूर के , है क्या ?
पिये जाम ए शराब जो ,
घूट भर भर ।
वो मयकशी क्या ?
पिये जो बे हिसाब साखी ,
जो तेरी नज़र से ।
वो सिवा तेरे....
किसी और का , तलबगार कहाँ ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी. .....✍️
वो इश्क ही क्या जो,
न जान सके दिल की ।
के...
रज़ा में हज़ूर के , है क्या ?
पिये जाम ए शराब जो ,
घूट भर भर ।
वो मयकशी क्या ?
पिये जो बे हिसाब साखी ,
जो तेरी नज़र से ।
वो सिवा तेरे....
किसी और का , तलबगार कहाँ ।
ज्योति प्रसाद रतूड़ी. .....✍️
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