हटा दिया है पैमाना अब हमने ,
जितना जी चाहे तू पी ।
बे-हिसाब पी....
मगर रहे ख्याल इतना कि ,
कदम कभी तेरे , लड़खड़ाने न पाये ।
वर्ना होगी रुसवाई , मेरे मयखाने की ।
ज्योति प्रसाद रतुड़ी........✍️
हटा दिया है पैमाना अब हमने ,
जितना जी चाहे तू पी ।
बे-हिसाब पी....
मगर रहे ख्याल इतना कि ,
कदम कभी तेरे , लड़खड़ाने न पाये ।
वर्ना होगी रुसवाई , मेरे मयखाने की ।
ज्योति प्रसाद रतुड़ी........✍️
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें