तुम तो नहीं थे कभी , मेरे ख्वाब ओ ख्याल में ।
फिर भी ना जाने क्यों , मेरे इस दिल में ।
तेरे होने का एहसास , नज़र आता है ।
***
ऐ मेरे दिल के अरमान , ऐ मेरी जान ए गज़ल ।
मेरी अनबुझी सी , प्यास हो तुम ।
कैसे करार आये अब तेरे बिन ,
मेरे प्यार का , पहला एहसास तो तुम ।
✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें