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मै आऊं आपके साथ....

 👧मै आऊं आपके साथ

👨हो यह मुमकिन गर , तो कयामत आ जाये ।

रोक लूंगा मैं हर वो तूफान जो हम दोनो के दरम्यान आ जाये ।

👧क्या बात है

👨सब असर आपका है , वरना हम कहां , बुझते दीये की रोशनी की तरह ।

👧गजब

👨मत दिलासा दिला , कह कर "गजब" 

हम दिल जले है , हर कदम पूंक कर रखा करते है ।

👧ओह

👨हैरान न हो , हम दिल में बहुत दर्द लिये हुए है ।

शिकवा हम तुम से क्यों करे , जहां इतने है वहां एक और सही ।

👧उफ्फ़

👨ऊफ न कर ! न परेशान हो , हम तेरे शहर से चले जायेंगे ।

हम तो मुसाफ़िर  है , जिनकी ना कोई मज़िल है ।

जहाँ सांझ ढले ,  वहाँ ठहर जाएंगे ।

👧आज की रात खास  होगी 

👨हर  रात का आलम , एक सा है हमारे  लिये ।

अखिर जख्म सहलाने का , मज़ा ही कुछ और है ।

✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी 


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