गैल नि न तुम म्यारा , कन्नी या गेल्याण छ ।
माया भी या भिंडी छ , फिर किले से मैसी दूर छ ।
दिल का आस पास छ , प्रीत लुकीं छुपीं हमारी ।
खयाळ कब तक रालू यू , कब तकै की आस छ ।
दिल का एक क्वाणा मू , बाँद तेरी मुखड़ी छ ।
रात का अंधेरा मु यकुली , सारू मेरु यू ही छ ।
सर आंदि भैर तू , ज्वान जनी दिखेंदी छ ।
गैल नि न तुम म्यारा , कन्नी या गेल्याण छ ,
माया भी या भिंडी छ , फिर किले मैसी दूर छ ।
❤️
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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