दर्द से रिश्ता , हर किसका होता है
ऐ दोस्त !
फर्क सिर्फ इतना सा है ...
कोई पी जाता है , चुप रह कर ।
और....!
कोई छलका देता , आंसुओं में बहा कर ।
****
कुछ बीत गयी है जिंदगी ,
कुछ और बितानी है ।
संग तेरा यूँ ही बना रहे तो...!
हर दिन सुहाना और...!
हर रात मस्तानी है ।
****
वो आए और आ के , चले गए ।
कुछ कहा भी नहीं और....!
सब कुछ कह के भी चले गए ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें