बंदे मातरम का , नारा लगा कर ।
उठा लो मशाल हाथों में ।।
खतरे में है आज देश फिर से ,
जय घोष गूंजा दो गलियारों में ।
बांध कफ़न सर पर अपने ,
कूद पड़ों रण अंगारों में ।
जात पात में न बटों तुम ,
धर्म से धर्म न टकराव ।
मिलकर पताका अपना तिरंगा ,
शीर्ष जग में लहराओ ।
शहीदों की कुर्बानी को ,
व्यर्थ कभी न जाने देना ।
मां का आंचल रहे सदा निर्मल ,
दुश्मन को कभी छूने न देना ।
बंदे मातरम , का नारा लगा कर ,
उठा लो मशाल हाथों में ।
खतरे में है आज देश फिर से ,
जय घोष गूंजा दो गलियारों में ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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