अब , ना मालूम क्यों नही आते ।
वो पहले से ख्वाब...?
ऐसा भी तो नही है कि ,
चाहत में ही , कोई कमी आई हो ।
दिन दुगना और , रात चौगानी सी बड़ी है ।
दिल की चाहत में तुम....!
फिर क्यों नही आती हो ,
मेरे इर्द गिर्द ?
उसी पहले से अंदाज में तुम ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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