कुछ आदत हो गई है आपकी ,
फिकर तो मुनासिब ही होगी ।
वैसे तो कई है दुनिया में ,
मगर चाहत हमें ,
हर किसी की ना होगी ।
आज ही तो नहीं हुई ,
गुफ्तगू तसली बख्श ,
ना ही दीदार हुए कुछ पल ,
हो जाते तो ,
दिल की ये हालत तो न होती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
कुछ आदत हो गई है आपकी ,
फिकर तो मुनासिब ही होगी ।
वैसे तो कई है दुनिया में ,
मगर चाहत हमें ,
हर किसी की ना होगी ।
आज ही तो नहीं हुई ,
गुफ्तगू तसली बख्श ,
ना ही दीदार हुए कुछ पल ,
हो जाते तो ,
दिल की ये हालत तो न होती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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