मैंने जिद्द छोडी है तुम्हे पाने की ,
उम्मीद नहीं ।
सुना है उम्मीद में जीना भी,
दिल को सकून , बहुत होता है ।
❤️❤️
हम तो रहे आज तक इसी भ्रम में , शायद असर हमारा है ।
हुनर वो सीखते रहे मोहब्बत के , किसी और के लिए ।
😎
बना ना लूं तो कहना , जिंदगी को अपने ही हिसाब से ।
बहुत जी लिया हूं अब तलक मैं औरों के हिसाब से ।
☹️
वर्षों लग जाते है ,किसी को प्यार पाने में ।
ये खुश नशीबी हमारी क्या कम है...!
चंद मुलाकातों में ही हम , इक दूजे के हो गए ।
😘😘
दिल में प्यार की समा , जलाए रखना ।
अपनी हसरतों में हमें , अपना बनाए रखना ।
मैं आऊंगा जरूर , इक दिन पास तुम्हारे
अपने दिल में मोहब्बत जगाए रखना ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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