जिंदगी का यही , इक फसाना है ।
खाली हाथ आए और , खाली हाथ ही जाना है ।
पैदा होते ही दौड़ की जिद्द थी हमारी ,
उम्र भर दौड़ते ही जाना है ।
बंद मुट्ठी लाया बांध मुक्कदर ,
मिलेगा वहीं जैसा नसीब लाया है ।
जोड़ लिया धन माया वैभव सारे ,
संग तो मधुर वचन ही जाना है ।
गज दो जमीन वो ही अंत तक , जिसका कर चुकाना है ।
ना तेरा ना मेरा सब यहीं रह जाना है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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