नही चाह किसी को , यूं आज तलक ।
"इश्क"
मालूम नहीं हस्र क्या होगा ।।
क्या मै ही हूँ इस तरफ डूबा , उनके ख्यालों में ।
या...
उन्हें भी मेरा , ख्याल होगा ।।
❤️❤️
बहुत खूब सूरत , यह पल है ।
जीवन के हर मोड़ पर , यह याद आएगा ।
धूप हो या छांव ,
रुकते कदमों का , सहारा होगा ।
हर पल घुली होगी मिठास इसमें, तेरे प्यार की ।
निराश ये मन , कभी न होगा ।
❤️❤️
बे बक ही ,कह जाता हूं मैं ।
पता नहीं क्यों ?
दिल से सिर्फ , तुम से ही,
बात करने को , जी चाहता है ।
समझ लो दीवाना या ,
और कुछ , अपनी समझ से ।
रहा नहीं जाता ,इक पल भी अब ,
तुम्हारे बिना ।
❤️
आप ज़रा और करीब आजाएं तो ,
क्या हर्ज होगा ?
मेरा....!
आपके प्यार की छांव में ,
रहने का जी , बहुत चाहता है ।
आरज़ू भी न रहेगी कोई ,
ना हसरत ही तब ,
पूरे हो जाएंगी , हर ख्वाइशें हमारी
तब ।
तेरे पहलुओं में , लिपटने का जी ,
बहुत चाहता है ।
❤️
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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