पता नही क्यों मगर...!
आज रह रह कर ,
तुम्हारी याद आ रही है ।
करवटें बदल बदल कर...!
रह गए हम मगर ,
आज हमे नींद , नही आ रही है ।
तुझे याद ना करने की, कसम तो
हमने खाई है मगर ...!
किया जो तुझे याद तो , मेरी इन आंखों में
बहे आंसू जो....!
दिल के कसूर की , सजा पाई है ।
पता नही क्यों मगर...!
आज रह रह कर ,
तुम्हारी याद आ रही है ।
करवटें बदल बदल कर...!
रह गए हम मगर ,
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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