उम्र भर की तलाश ,
पल भर में ही , खत्म हो जाए ।
अगर...!
तेरा खिलखिलाता हुआ चेहरा ,
हमें जो...!
इक बार , नजर आ जाए ।
फिर ना तमन्ना कोई ,
ना आरजू ही रहे ऐ हुश्न !
बस जो तू !
इक बार ही सही , मेरे गले से लग जाये ।
हो जाए मुकम्बल , दास्ताँ मेरे इश्क की
रही जो अधुरी अब तलक...!
हो जाए पूरी वो ,गर तेरे मोहब्बत की ,
ऐ हुश्न !
मेरे दिल पर सही* हो जाए ।
* हस्ताक्षर
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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