ये तेरी ख़ामोशी , ये तेरा उदास मन ।
कहीं हमारी जान ना ले ले सनम ।
नहीं बर्दास्त मुझे कोई भी तेरा गम ।
तुम क्या जानों तुम क्या हो मेरे ,
मेरी जिंदगी हो तुम ।
एक अहसास है प्यार का जो ,
तेरे दिल से ही तो पाया है मैंने ।
तुझसे मिलने के बाद ही तो ,
जिंदगी को जाना मैंने ।
किस कदर छुपा कर गम , मुस्कुराते है लोग ,
यह राज है जिंदगी का एक खूब सूरत इल्म ,
वो तुझसे ही जाना मैंने ।
तू प्यार है किसी और का , तेरी दुनिया तेरे लोग ।
खुश रहो तुम सदा , अपनी प्यार भरी दुनिया में ।
कहीं मेरा दर्द ना बन जाए , तेरे दिल का कोई रोग ।
तेरी दुनिया से , मै अब चला जाऊंगा ।
सपना समझ कर , भूल जाना मुझे ,
अब न तेरी दुनिया में , मैं वापस आऊंगा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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