दर्द बहुत है...!
दर्द ए दिल की , दवा क्या है ?
मुमकिन हो कि , मिल जाए दवा कहीं ।
ऐ खुदा बता....!
उस मुकाम का पता , क्या है ?
बहुत तलाश किया , मगर सकून ।
मिला तो , कहीं भी नही ।
है भी क्या , कहीं जमाने में ?
है तो , उसका पता क्या है ?
धुंधलाती नजर अब , थक चुकी ।
लौट आई वापस अब ,
अंखियों के झरोखों में ।
हो कब न जाने बंद, ये पलकें अब ।
रहूं कब तलक , इस इंतजार में ।
वो वक्त मेरे नसीब का , है भी क्या ?
जो मिलें चैन मुझे ,सदा की खातिर ।
है जो वो वक्त तो ,उस वक्त का पता क्या है ?
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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